दिवाली की शुभकामनायें
न तो सबकी मिलीं और
न सबको दी ही गईं।
और दिवाली बीत गई
उसी तरह से जैसे
बीतती है हर साल।
पर इस साल नहीं
हुआ हंगामा अधिक
और न मचा बवाल।
मिलावटी मिठाई का रहा
पूरा शोर , डरे डरे लोग
क्या तो खाते और क्या खिलाते ?
ज्यादा खुशहाल नहीं
तो अधिक बेहाल भी नहीं
इतने में ही सब्र है हमको।
सेंसेक्स भी चढ़ ही रहा है
जिस दिन गिरना होगा शुरू
उसी दिन होगा दुख।
रह रह ये दिवाली आयेगी
बार बार याद आयेगा
सेंसेक्स चढ़ता ही रहा।
एक दिवाली तो ऐसी मनायें
जब न तो पटाखे जलायें
न प्रदूषण फैलायें ।
विचारों का भी नहीं
ब्लॉग पर भी नहीं
ऐसा होगा कभी ?
मिलावटी विचार भी नहीं
मिलावटी मिठाई भी नहीं
मतलब मिलावट नहीं।
पर ऐसी करवट की
मुझे तो उम्मीद नहीं
पर विश्वास है एक को।
वो एक कौन है
जो अनेकता में भी
इतना नेक है।