गुरुवार, १७ दिसम्बर २००९

अहा जिंदगी क्‍लब दिसम्‍बर 2009 का एक पन्‍ना


अहा जिंदगी का एक एक पन्‍ना
जिंदगी को जीवंत बनाता है

अहा जिंदगी मासिक पत्रिका से साभार

बुधवार, २ दिसम्बर २००९

पहचानिये भी और अब 5 दिसम्‍बर को मुंबई में मिलेंगे (अविनाश वाचस्‍पति)

पहले पहचानिये मेरे सिवाय हैं जो


4 दिसम्‍बर 2009 को
चलूंगा मुंबई के लिए
पहुंचूंगा 5 दिसम्‍बर को
सुबह वहीं होगी
उस दिन मेरी।

मुलाकात भी उनसे होगी
जिनसे होती रहती है सदा
कभी लिखचीत
कभी बातचीत।

कार्यक्रम यहां पर भी है

मंगलवार, १ दिसम्बर २००९

40वेंअंतर्राष्‍ट्रीय फिल्‍म समारोह गोवा का 1 दिसम्‍बर 2009 का इफ्फी डेली (अविनाश वाचस्‍पति)

इसमें हिन्‍दी पेज भी हैं दो
इफ्फी डेली 1 दिसम्‍बर 2009
http://iffi.nic.in/2009/iffidaily01dec.pdf
करें क्लिक और पढ़े पी डी एफ फाईल
और लें पूरी जानकारी
तथा दें अपनी राय।

मंगलवार, १० नवम्बर २००९

अब इन्‍हें पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)


चित्र पर क्लिक करिए और पहचानिए सिर्फ बतलाइये नाम। बतला सकते हैं कुछ और भी पहचान।

बुधवार, २८ अक्तूबर २००९

आइये इन्‍हें पहचानें (अविनाश वाचस्‍पति)


ये पहेली नहीं है
जीवन एक पहेली है।

शनिवार, २४ अक्तूबर २००९

मोहनदास करमचन्द जी ने पत्र लिखा, पत्र में लिखा ....


.... मेरे पास यह अखबार भास्‍कर आज ही पहुंचा है और मैं इसका जवाब नुक्‍कड़ ब्‍लॉग पर इसलिए दे रहा हूं क्‍योंकि इसे जानने के अधिकारी लोगों तक बात पहुंचाने के लिए नुक्‍कड़ ही मुझे जंचा है और इसी ब्‍लॉग के मॉडरेटर अविनाश ने अपने नाम के ब्‍लॉग अविनाश वाचस्‍पति पर हिन्‍दी ब्‍लॉग जगत की (गर महात्‍मा गांधी ने ब्‍लॉग बनाया होता) प्रतिक्रिया जानी थी। मैं बतलाना चाहता हूं कि मैं अपने हिन्‍दी ब्‍लॉग का नाम बापू ही रखता, राष्‍ट्रपिता नहीं रखता। सहज और सादगी का पर्याय – यह सूत्र वाक्‍य होता मेरे ब्‍लॉग का। बिना लाग लपेट के अपनी बात अपनी मजबूती से कहने वाला।

मैं भी हाड़ मांस का ही इंसान था और वही नियम मेरे पर भी लागू होते हैं। 140 बरस का मैं कैसे हो सकता हूं। इतना झूठ, जबकि यह मीठा झूठ है जबकि मैं बार बार कहता रहा हूं मुझे झूठ इसके बाद का पहले का हिस्‍सा और सबकी राय पढ़ने तथा अपनी राय देने के लिए यहां पर क्लिक कीजिएगा

मंगलवार, २० अक्तूबर २००९

और दिवाली बीत गई (अविनाश वाचस्‍पति)

दिवाली की शुभकामनायें
न तो सबकी मिलीं और
न सबको दी ही गईं।

और दिवाली बीत गई
उसी तरह से जैसे
बीतती है हर साल।

पर इस साल नहीं
हुआ हंगामा अधिक
और न मचा बवाल।


मिलावटी मिठाई का रहा
पूरा शोर , डरे डरे लोग
क्‍या तो खाते और क्‍या खिलाते ?

ज्‍यादा खुशहाल नहीं
तो अधिक बेहाल भी नहीं
इतने में ही सब्र है हमको।

सेंसेक्‍स भी चढ़ ही रहा है
जिस दिन गिरना होगा शुरू
उसी दिन होगा दुख।

रह रह ये दिवाली आयेगी
बार बार याद आयेगा
सेंसेक्‍स चढ़ता ही रहा।

एक दिवाली तो ऐसी मनायें
जब न तो पटाखे जलायें
न प्रदूषण फैलायें ।

विचारों का भी नहीं
ब्‍लॉग पर भी नहीं
ऐसा होगा कभी ?

मिलावटी विचार भी नहीं
मिलावटी मिठाई भी नहीं
मतलब मिलावट नहीं।

पर ऐसी करवट की
मुझे तो उम्‍मीद नहीं
पर विश्‍वास है एक को।

वो एक कौन है
जो अनेकता में भी
इतना नेक है।